Shiv Bhole Bhandari|शिव भोले भण्डारी

(तर्ज : नटवर नागर नंदा…)

शिव भोले भण्डारी,
भजोरे मन त्रिपुरारी ।।

अंग विभुति गल रूण्डमाला,
नीलकण्ड है नयन विशाला,
नंदी की असवारी, भजो रे मन…….

डमरु वाले देव निराले,
व्याकुल मन की प्यास बुझाले,
शिवगंगा सिरधारी, भजो रे मन……

उमापती शिव बमबम भोले,
द्वार दया का जब ये खोले,
कटती विपदा सारी, भजो रे मन…..

इनकी एक नजर से सारे,
हो जाते है वारे न्यारे,
नाम है संकट हारी, भजो रे मन……

राम दास शिव औघढ़ दानी,
रांवर’ महिमा वेद बखानी,
रोज चढ़ा जल झारी, भजो रे मन…..

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