Rusya Kaiya Shyam Batano Padsi|रुस्या कईया श्याम बताणो पड़सी

रुस्या कईया श्याम,
बताणो पड़सी,
टाबरिया बुलावै,
थाने आणो पड़सी ।।

तर्ज – अपने दिल का हाल।

म्हे टाबर थे मायत स्याणा,
भलो बुरो म्हे कुछ ना जाणा,
म्हासु रुस्या कइया सरसी,
म्हे तो थारा दास पुराणा,
म्हारे सिर पर हाथ,
फिराणो पड़सी,
टाबरिया बुलावै,
थाने आणो पड़सी ।।

भूल चूक की माफ़ी चाहवा,
राजी होज्या श्याम मनावा,
नाराजी थे मेटो बाबा,
चरणा माही शीश झुकावा,
बालकिया नै श्याम,
निभाणो पड़सी,
टाबरिया बुलावै,
थाने आणो पड़सी ।।

‘हर्ष’ भरोसो म्हाने भारी,
अर्जी सुणसी श्याम हमारी,
लूक मीचणी मत ना खेलो,
आदत म्हे जाणा हाँ थारी,
बाबा म्हारो मान,
बढ़ाणो पड़सी,
टाबरिया बुलावै,
थाने आणो पड़सी ।।

रुस्या कईया श्याम,
बताणो पड़सी,
टाबरिया बुलावै,
थाने आणो पड़सी ।।

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