ऊंचो राख निसान श्याम को लाम्बी डोरी खींच फागण आग्यो साथिड़ा मिलकर चालां सगला खाटू बेगो टिकट कटा
तर्ज – सोजया मेरा लाल
ऊंचो राख , निसान श्याम को , लाम्बी डोरी खींच …-2
भजन सुनाता , चाला रींगस …
खाटू नगर के बीच
फागण आग्यो साथिड़ा , मिलकर चालां सगला खाटू …
बेगो , टिकट कटा
रिंगस से , निशान , उठावां … खाटू नगरी , पैदल जावां
रेसम की डोरी ने , पकड़ा.. नाचा , बीच बाजार
भगता के संग , ठुमक ठुमक कर ..
नाचे , खुद सरकार
फागण आग्यो साथिड़ा , मिलकर चालां सगला खाटू ….
बेगो , टिकट कटा
सांवरिया के , द्वारे , जाकर … श्याम रिझावां , भजन सुणाकर
जोत जगावां , श्याम धणी की … से , ग्यारस री , रात
बारस ने , करां , खीर चूरमो … दयां , जोड़े से , जात
फागण आग्यो साथिड़ा , मिलकर चालां सगला खाटू….
बेगो , टिकट कटा
फागणिये की , रुत मस्तानी … बरसे अमृत , चारु कानी
साँवरियो भी , ले पिचकारी … खेल रयो है , फाग
एसो मोको , मत ना चूको … तन मन , रंग ल्यो , आज
फागण आग्यो साथिड़ा , मिलकर चालां सगला खाटू….
बेगो , टिकट कटा
श्याम को , रंग जद , चढ़ जावेगो … दिन दिन , और , निखर जावे गो
चाहे जितना , धोले गाबा… कदे ना , उतरे दाग
गढ़ो श्याम , रंग है सरिता … चढ़े , फाग के फाग
फागण आग्यो साथिड़ा , मिलकर चालां सगला खाटू…..
बेगो , टिकट कटा
