(तर्ज : जिसकी ऊँगली पर चलता)
कैलाश पर बैठी ईसर जी के साथ हैं,
कोई और नहीं वो ईसर जी की नार हैं
पर्वत पर लगाके बैठी यो दरवार हैं
मेरी गौरा हैं… मेरी गौरा हैं
तुम टीका मांग के देखो, वो नथनी साथ देगी
तुम नेकलेस मांग के देख्खये, वो झुमके साथ देगी
पलभर में देगी सबको एक समान है
मेरी गौरा हैं…मेरी गौरा हैं
तुम चुडला मांग के देखो, वो बाजूबंद साथ देगी
तुम पायल मांग के देखो, वो बिछिया साथ देगी
पलभर में देगी सबको एक समान हैं
मेरी गौरा हैं… मेरी गौरा हैं
