आधी रात ने घर आयो बालम रसीयो जी
म्हं सुती जोवू बाट लगाकर तकीयो जी
आधी रात ने…
(१) म्हं नींद सूं उठकर जागी
म्ह घर से निकल कर भागी
बा रात बड़ी बडभागी
मन लगन प्रेम री लागी
मैं भरु रे चूठिया यौवन ऊपर साहिबजी
म्हारें मन रो निकल्यो वहम आ गया साजन जी
आधी रात ने …
(२) हिरनी सी मैं शरमाई
बे पकड़ी म्हारी कलाई
अरे धणा दिनां सूं म्हें तो
साजन सूं नजर मिलाई
म्ह खांई रे कलाकंद रबड़ी और मलाई जी
मन ले गया भवसागर में खुब तिराई जी
आधी रात ने….
(३) म्हारा जोश पड़ गया फीका
उल्टा हुंया मांग का टीका
म्हं शर्म से नजर गड़ाइ
बे देव म्हांन बधाई
मन नही चहीज मुन्नो मुन्नी गावे के.डी.जी
बा गुम सुम रेव रोज खावे भई माला डी
आधी रात ने ….
गीतकार – गायक के.डी सोमानी
