आवो जी आवो म्हारां हिवड़े रा साहिबा
तारा छायी रात थानें आणो पड़सी
थारे बिना रे फागण सुनो ज्यासी
थारे बिना फागण कुण गासी
आवोजी…
सावण बरसे, भादवो बरसे, बरस रही दोनो आंखडली
थे तो साहिब म्हारे मनड़े री कोर सा
मनड़े री प्यास बुझायां सरसी
आवोजी…
सेज बिछाई चादर लगाई टेबल राख्यो दूध जी
थारे बिनां रे म्हाने काम्बल सूनी लागे
चादर में सब घालणे आनो पड़सी
आवोजी…..
सारी सखियां रा साहब घरां रे पधारया
म्हारोडो बसे है परदेशा जी
थारे बिना रे साहिब, घर सुनों लागे
सूरत में कांही रे बाप रो नाम काढ़सी
आवोजी…
गीतकार गायक के.डी. सोमानी
