नई रे परणोयोड़ी न हुयो रे फेन्टोड़ो,
ना करे पाठ पुजा है नित को रगड़ो
बातो गुमसुब रेवे सारी रात
मेंहदीपुर री बोली है वे जात
नई रे परणोयोड़ी……..
सासु रे मुँह सुं बोल्या रे पितरजी
साणा भोपा न लावो डोरा मंतर सी
कोई समझ ना म्हारे जी री बात
पिया री अणुती आवे याद
नई रे परणोयोड़ी…….
झोली और दाढी वाला आया रे भोपा
भोपा न देख बिनणी फाड़ दिया सोफा
बा तो घर में मचा दी हाहाकार
भुखी सिंहणी हो गयी खुखांर
नई रे परणोयोड़ी…….
बुढकी दादी समझावा लागी
बिनणी में कोनो चेड़ो चपाटी
थे तो कालु न बुलावो हाथो हाथ
दोना ने कमरे में रोड़ो साथ
नई रे परणोयोड़ी…..
कालु जद आयो भुतणी भागी
दौड़ दौड़ बिनणी काम पे लागी
सब न हुवे रे अचंभो एक साथ
तुं काई करग्यो कालु रातो रात
नई रे परणोयोड़ी……….
गीतकार गायक के.डी सोमानी
