जयपुर की चुन्दडी सा गौरी न ल्यादो सा
तारां की चुन्दडी सा गौरी न ल्यादो सा
पहर के चुन्दडी देखो-गौरी महला आवे सा
जयपुर की …..
बीकानेर को लंहगो गोटे सूं भरीयो सा
जोधाणे रो कब्जो मोतीयां सूं जड़यो सा
ठुमक ठुमक कर चाले चाले रजवाड़ीसा
जयपुर की…
साहिब जी निरखे सा, सासुजी निरखे सा
नजर उतारे सगला, भई देव दुआया सा
जयपुर की…
पनघट पर जाऊं सा, पणीहारीयां निरखे सा
कुवे पर जाऊं सा-म्हारी सखींया निरखे सा
हाथ सुं छुटी मटक्या भई लेव बलाया सा
जयपुर की…
गीतकार गायक के.डी सोमानी
