मत जाइजे परदेश म्हारा छैला
मारूंली कीने हैला
थारे बिना सुनो आंगणीयो
थारे बिना सुनो आंगणीयो, फीको लागे फागणीयो
मत जाइये….
में तो सूती गहरा रे बोल्या मोर
भीजी आंख्या री कोर
केबुंली में तो किण न बोल
केवुली में तो किण न बोल, हिवड़े में उठे रे हिलोर
मत जाइये….
उड़ती कुरंजा तुं जाइजे परदेश
लेती जाइजे सन्देश
नही तो खाऊं था पर तेस
नहीं तो खाऊं था पर तेस, गौरी राखे खुला केस
मत जाइये……
करवट बदली टूटी माचे री इस
अणुती आवे रीस
थारे बिना सुनी सेजड़ली
थारे बिना सुनी सेजड़ली,
उड गयी म्हारी नींदड़ली
मत जाइये……
गीतकार गायक के. डी सोमानी
