(तर्ज थाली भरकर ल्याई रे खीचड़ो)
चाली म्हे गणगौर पूजणे, बन अलवेली नारजी
त्यादो म्हाणे छैल भंवर सा, रंगीलो चूनर साज जी
जयपुर से म्हे पोत मंगाई, गोटा लगी किनार जी
सात रंग पल्ला पर छाप, मोत्या जड़ी हजार जी
थे भी चालो सागे म्हारे, बांध केसरिया पाग जी
बणठण कर आई सहेल्या, कर सोलह सिणगार जी
म्हे भी पहर ओद इतरावा, ज्यू नखराली बार जी
गीत गावां नाम सुणावा, घूमर घाल्या साथ जी
रोली हल्दी मेहंदी काजल, सुन्दर थाल सजायो हैं,
फल बिन्दोली डूबी आख्खा, जोड़ जवारा उगायो हैं ईसर गौर बंनावा म्हे तो, पूजू गणराज जी
चाली म्हे गणगौर पूजने, बन अलबेली नारजी
