बादिला कहनो मान रे, बादिला कहनो माँ रे,
मनभरिया कहनो मान, टाबरिया स्याना होग्या रे बादिला अब तो मान -२
भरी जवानी माय बालमा जोबन झोला ख़ातो,
मेरी पतली कमर मेरा काला केश दुनिया को जी ललचातों,
बे रूप पुराणा.. होग्या, बादिला अब तो मान, टाबरिया स्याना होग्य रे….
मनवारा से मानती कोई ढलती माजल रात,
साज छतीसू बाजता जद हिवड़े धरता हाथ,
बे साज पुराणा… होग्या, बादिला अब तो मान, टाबरिया स्याना होग्या रे….
रात अंधेरी चोबारे में कोई सेज बिछावन आती,
थारी बाँकड़ली मूछया ने देख माहरी छाती धड़का खाती,
बे जोश पुराणा… होग्या, बादिला अब तो मान, टाबरिया स्याना होग्या रे….
