आज्या-प्रेमी बागां में कोयलड़ी बोले हैं
मनड़ो म्हारो डोले हैं
मदरी-मदरी-चले बसंन्ती
घुघट खोले है
आज्या प्रेमी….
नदी किनारें बैठयों प्रेमी झर झर आंसु रोवे हैं
दौड़ी-दौड़ी आयी रे प्रेमीका – २
पायल बाजे हैं
बाणो हियो कांपे हैं राही मनवा……
आज्या प्रेमी ….
चढती जवानी थारी लेवे अंगडाई तु तो नार पराई हैं
म्हारे लारे हुई क्यूं बावली २
थारी काल सगाई हैं
तु तो अजब लुगाई हैं मेरे देश
आज्या प्रेमी ….
थारे-साथे प्रीत पुरानी सारी दुनिया जाणे हैं
थारो म्हारो प्रेम अमर है २
सौंगाध खाई हैं
नहीं सहन जुदाई हैं सुन मेरे वन्धुरे ….
आज्या प्रेमी….
थारी-म्हारी-प्रेम कहाणी फागणीया ही जाणे हैं।
दोनों प्रेमी दुनीया छोडी – २
स्वर्गा जावे हैं, जनम जनम का साथ ….
भाई K.D. गावे हैं
आज्या प्रेमी …
गीतकार गायक – के.डी सोमानी
