नैन उड़िका माहरा मनभरिया,
कोई भँवर सा थाने घना लाड लडाया ए सहेलियाँ
। नैन उदिका माहरा….
अरे पूछे क्यू रात री बातिया जुलम में कियो – २
माने ईलूडे ज्यू अंग लगायी राखी ए सहेलियाँ ।
नैन उड़िका माहरा…
घुंघटियों उठायों भँवर जी जुलम कियो-२
हो महरी हथेलियाँ री मेहंदड्ली सरमायी ए सह्नेलिया ।
नैन उड़िका माहरा…
जोबनियो निखारो भँवर जी जुलम कियो -२
ओ कोई बिजूली सी तन में कड़कन लागी ए सहेलियाँ।
नैन उड़िका माहरा ….
