ले लो अपनी शरण में अंजना के ललन
दास बनकर खड़े सारे द्वार पर
कर दो कोई जतन तुम हो संकठ हरण
अब ये नैना निहारे खड़े द्वार पर
एक चमत्कार बच्पन में दिखला दिया
फल समझकर निगल बैठे सूरज को तुम
मच गई खलबली जय हो बजरंग बली
देवता सब पुकारे खड़े द्वार पर
देवता सब पुकारे खड़े द्वार पर
यू भटकते रहे रिछ बानर सभी
जानकी को कोई खोज पाया नहीं
जा के लंका जलाये सिया से मिले
प्राण सबके उभारे खड़े द्वार पर
ले लो अपनी शरण में अंजना के ललन
दास बनकर खड़े सारे द्वार पर
शक्ति जिस पल लगी थी लखन को सुनो
हो गये थे विकल्प राम करुणा निधि
पूरा पर्वत उठाकर पवन वेग से
लेके बूटी सकारे खड़े द्वार पर
ले लो अपनी शरण में अंजना के ललन
दास बनकर खड़े सारे द्वार पर
कौन सा काज जग में कठिन भला
है पवन सुध जिसे आप कर ना सको
कर लो स्वीकार अर्जी समर्थ की
मिश्र बंधु पुकारे खड़े द्वार पर
ले लो अपनी शरण में अंजना के ललन
दास बनकर खड़े सारे द्वार पर
दास बनकर खड़े सारे द्वार पर
