ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
डमरू की तान सुन कान्हा जी आए,
कान्हा जी आए, संग राधा जी आए ।
वहीं सखियों का मन भी मगन हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने…
डमरू की तान सुन गणपति भी आए,
गणपति चले, संग कार्तिक भी चले ।।
हो माँ अम्बे का मन भी मगन हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने…
डमरू की तान सुन राम जी भी आए,
राम जी भी आए, संग लक्ष्मण जी भी आए ।
मैया सीता का मन भी मगन हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने…
डमरू की तान सुन ब्रह्मा जी भी आए,
ब्रह्मा जी आए, संग विष्णु जी आए ।।
मैया लक्ष्मी का मन भी मगन हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने…
डमरू की तान सुन सूरज जी आए,
सूरज जी आए, वहाँ चंदा भी आए ।।
सारे तारों का मन भी मगन हो गया,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने,
सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया ।।
