तर्ज – में निकला गडडी लेकर
दिखने में तो है बन्दर,
ताकत में है भयंकर
भूचाल आया, सुना है हनुमान आया
कैसे वो समुन्दर लांघ गया,
तुम सब को सांप क्यों सूंघ गया
क्या लंकिनी ने नहीं रोका था,
दुश्मन को क्यों नही टोका था
रोका था, टोका था, उसे भी मार आया
सुना है…
उद्यान अशोक उजाड दिया,
वृक्षों को उसने उखाड दिया
माली जब रोकने भागे थे,
अब क्या बोलू वो अभागे थे
सुत अक्षय को है मारा, कितनों को है पछाड़ा,
मै बचके भाग आया
सुना है…
जैसे ही पूंछ दी आग लगा,
वो वीर बड़ा उछला-कूदा
सोने की लंका खूब जली,
अरे वाह वाह रे बजरंग
भगवन को है ये माया,
कोइ जाने न लहरी तेरा प्यार
सुना है…
