हनुमान कहें दश मुख से क्यूं तूने, मत तेरी मारी है।
तू पड़ जा चरणों में राम जी सब पर भारी हैं।।
बल बुद्धि का हर दम तूने किया बड़ा अभिमान,
तीनो लोक के स्वामी का तूने किया घोर अपमान,
इस दुनियां के प्रभु सिया राम जी पालन हारे हैं।
तू पड़ जा ……
मात सिया का हरण किया तूने किया नीच का काम,
चिंता करते मेरे राम जी पल भर ना आराम,
शूर्पणखा का दिया काट नाक अब तेरी बारी है।
तू पड़ जा……
बिलख रही मां सिया राम से मिलने की थी आश,
में चाहूं तो कर दूं तेरा पल भर मैं ही नाश,
श्री राम की आज्ञा पै हमारी पूरी सेना बारी है।
तू पड़ जा …..
सोच रहा तू बैठ महल में कैसे पाऊं पार,
भोले नाथ जी स्वैम ही जपते राम का नाम अपार,
तेरी नादानी का भोग भरे अब लंका सारी है।
तू पड़ जा……..
