किसने सजा दिया तुझे, इतना श्रृंगार करके।
ईसर जी के संग आना, घर में बहार बनके ।।
माथे पे सजी बिंदिया, कानों में सोहे कुंडल।
हाथों में खनके चूड़ियां, पावों में सोहे पायल ।।
किसने सजा दिया तुझे, इतना श्रृंगार करके
मेंहदी के नख साजे, हैं चूंदड़ी निराली।
सखियां झूमे नाचे हुई तेरी दीवानी ।।
किसने सजा दिया तुझे, इतना श्रृंगार करके
सखियों को सुहाग देना, हरदम कृपा तू रखना।
हर साल आना, सदा ही मुस्कुराना ।।
किसने सजा दिया तुझे, इतना श्रृंगार करके।
